सीएटल (SEATTLE)शांति योजना

1993 में वाशिंगटन डी. सी. (Washington, D.C.) में शांति के लिए एक मैडिटेशन कार्यक्रम ने उग्र अपराधों में 23% की कमी की थी।  इस योजना में कुछ 4,000 मैडिटेशन विशेषज्ञ शामिल हुए थे और महत्वपूर्ण परिणाम पाए थे.। इस अद्भुत खोज को अबतक किसी और ने बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने का प्रयास नहीं किया।

यह सीएटल (Seattle) शांति योजना स्वयंसेवकों की सहयोग प्राप्त कर रही है, ताकि वे जून 2018 से सितम्बर 2018 तक हर दिन ध्यान और प्रार्थना में वक़्त बिताये और सीएटल (Seattle) में शांति और अमन के लिए प्रार्थना करें।  जल्द ही एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन (software app) मुफ्त में उपलब्ध होगा।  इस एप्प (app) के जरिये जो भी इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वे प्रार्थना और ध्यान के समय कहीं से भी इसमें लोग-इन (login) करके भाग ले सकते हैं। जो कोई भी एक सामूहिक मैडिटेशन या प्रार्थना कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। परन्तु जो नहीं शामिल हो सकते वे अपने घर, गाढ़ी, या किसी कॉफ़ी शॉप में बैठकर भी इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। सारे उग्र अपराधों के रिकार्ड्स की परिक्षण की जाएगी ये देखने के लिए कि क्या वास्तविक तौर पर इसमें कमी आयी है। आंकड़ों की जांच भी की जाएगी ये अंदाजा लगाने के लिए कि क्या ये कमी सिर्फ संयोग से आई है। यहाँ देखिये अपराधों के आंकड़े: किसी एक या एक से अधिक वर्ष को चुनिए। “ग्रुपवाले डोपडाउन मेनू (drop-down menu) मेंपर्सन क्राइम” (“person crime”) को चुनिए और निचे दिए आंकड़ों को देखिये

अगर हम ये साबित कर सकें के प्रार्थना और मैडिटेशन से एक शहर में फर्क दिख सकता है, तो भविष्य में इसका काफी बड़ा तात्पर्य निकल सकता है। हमारे योजना से हर जगह के लोग अपना जीवन फिरसे शुरू कर सकते हैं, और हर दिन प्रार्थना और ध्यान के लिए समय निकाल सकते हैं। इससे भविष्य में एक सम्पूर्ण परिक्षण, हमारे असल क्षमता की समझ, तथा शांति और एक सच्चे सांस्कृतिक बदलाव की अपेक्षा की जा सकती है।

ये परिक्षण पूरी तरह स्वयंसेवकों के प्रयासों पर निर्भर करता है। हम इसके लिए इकठा की गई राशि अपने किसी निजी कार्य में लगाने का उद्देश्य नहीं रखते। चाहे आप किसी धार्मिक संगठन से जुड़े हुए हों या नहीं, हम निवेदन करते हैं के आप सब इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भाग लेने के लिए आपका सीएटल (Seattle) में होना ज़रूरी नहीं है।

             आप कैसे सहायता कर सकते हैं:

  1. इस योजना के बारे में अपने दोस्तों को बताईये।

  2. योजना बनाने और उसपे अमल करने में हमारी सहायता करें।

  3. हमारे विचारों को सोशल मीडिया पर प्रोत्शाहित करें। फेसबुक (Facebook), ट्विटर (Twitter)पे हमें लाइक और फॉलो करें। हमारे सूचनापत्र ले लिए साइन-अप करें। और हमारे मीट-अप ग्रुप को ज्वाइन करें। इसके बारे में सबको बताएं।

  4. हमारे पोस्टर्स प्रिंट करके कॉफ़ी शॉप्स, बाज़ारों, पुस्तकालयों, पार्कों आदि में लगाएं। निचे डाउनलोड (download) करिये।

5 अपने स्थानिये धार्मिक गुरुओं से मिलिए और उनसे पूछिए अगर वे भी इस योजना का हिस्सा बनना चाहते हैं.। (अगर आप इस पात्र को आप प्रिंट करके अपने साथ रखें तो आप भी होलिस्टिक हेल्थ रिसर्च के प्रतिनिधि बनकर जा सकते हैं) अगर आप किसी धार्मिक संगठन से सम्भन्ध रखते हैं, तो कृपया अपने साथियों को भी बताइये। और अपने गुरुओं को भाग लेने के लिए कहिये।

6 प्रार्थना संगठन और मैडिटेशन कार्यक्रम आयोजित करिये या ऐसे कार्यक्रमों में भाग लीजिये.।

7 स्थानीय अख़बारों, पत्रिकाओं, और समाचार संगठनो को इसके बारे में छपने छापने के लिए कहें।

8 हमे हमें अपना नाम या अपनी कंपनी का नाम इ-मेल करिये। हमारा साथ देने का और इस योजना में भाग लेने का निर्णय लीजिये: हमे आपको या आपके कंपनी को शामिल करके ख़ुशी होगी।

9 आपके प्रार्थना या मैडिटेशन समय को रिकॉर्ड करने के लिए हमारा एप्प डाउनलोड (download) करिये।

10 अपने प्यार भरे शांति वाले विचारों को पुरे शहर में भेजिए.। इस वेबसाइट पे आनेवाले कार्यक्रमों के बारे में जानिए। और प्रयास करिये के इस साल हमारे प्रार्थनाओं और मैडिटेशन कार्यक्रमों में भाग ले सकें। चलिए साथ में इतिहास रचते हैं। और आने वाले नए युग को बेहतर बनाने के लिए नीव रखें।

कैसे कोई गिरिजाघर, मंदिर या कोई होइ और संस्था भाग ले सकती है

1 हमारे योजना का साथ दीजिये और अपने साथियों को भाग लेने के लिए उत्साहित करिये।

2 हमसे संपर्क करिये और बताइये के आप इस प्रोजेक्ट में हमारे साथ हैं

है ना आसान!

अगर आपको लगता है के ये प्रोजेक्ट एक अच्छा कार्य है, तो कृपया इसमें भाग लें और दूसरों को भी इसके बारे में बताएं। कभी कभी अगर आप कुछ चाहते हैं तो आपको खुद कदम उठाना पड़ता है, खुद आगे बढ़ना होता है। अगर होलिस्टिक हेल्थ रिसर्च किसी और के सहारे का इंतज़ार करता तो अभी तक सीएटल पीस प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ होता।याद रखिये, ईसा मसीह ने कहा था, “मेरे पीछे आओ और मैं आपको मच्छ्वारों के आदमी दूंगा।” ये नहीं कहा केखुद शामिल मत हो, पहले किसी और को करने दो।” जीवन दूसरों को बढ़ते देखने का नाम नहीं हैजो हिचकिचाता है वो खोजता हैविश्व शांति यहीं शुरू होती है, अभी!

सीएटल पीस प्रोजेक्ट एप्प (SEATTLE PEACE PROJECT APP) को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करिये।

                                                 इस एप्प को इस्तेमाल करते समय कृपया ध्यान दें:

  1. “टाइम” (Time) का अर्थ है आपने जितना समय प्रार्थना या मैडिटेशन में बिताया। ये “hh:mm” में रिकॉर्ड होता है, और बताता है के आपने कितने घंटे और मिनट्स प्रार्थना किया। 01:00 का अर्थ है एक घंटा और 00:30 का अर्थ है आधा घंटा। ये दिन का समय नहीं बताता है बल्कि आपके प्रार्थना का कुल समय बताता है।3 कभी भी रिकॉर्ड करने के लिए “सबमिट” (submit) पर क्लिक करिये.। आपको “प्रेसेर्व प्रोजेक्ट” (preserve project) या “प्रेसेर्व टास्क नेम” (preserve task name) को सेलेक्ट करने की आवश्यकता नहीं है। आप “फिल्टर्स” ऑप्शन (filters option) को साधारण रिकॉर्डिंग के समय नज़रअंदाज़ कर सकते हैं.। आपको सिर्फ “रिपोर्ट फॉर्म” (report form) की आवश्यकता पड़ेगी।

  2.  यदि आप किसी भक्ति कार्य के लिए “other – please specify” चुनते हैं तो अगर आप चाहें तो इसका विस्तार हमे “एक्टविटीज” बॉक्स (“activities” box) में बता सकते हैं.। जहाँ “detailed description of activities” लिखा है। आप इसको बिना भरे भी अपना फॉर्म जमा करा सकते हैं।

  3. कभी भी रिकॉर्ड करने के लिए “सबमिट” (submit) पर क्लिक करिये.। आपको “प्रेसेर्व प्रोजेक्ट” (preserve project) या “प्रेसेर्व टास्क नेम” (preserve task name) को सेलेक्ट करने की आवश्यकता नहीं है।

  4.  आप “फिल्टर्स” ऑप्शन (filters option) को साधारण रिकॉर्डिंग के समय नज़रअंदाज़ कर सकते हैं.। आपको सिर्फ “रिपोर्ट फॉर्म” (report form) की आवश्यकता पड़ेगी।

निचे दिए गए पोस्टर्स को डाउनलोड (download) करके प्रिंट कराईये और बांटिए:

Seattle Peace Project
Seattle Peace Project
Seattle Peace Project

आपका थोड़ा सा समय बड़े बदलाव ला सकता है। आपको बहोत कुछ करने की प्रतिज्ञा नहीं लेनी है। अगर सारे लोग थोड़ा थोड़ा करके योगदान करें तो भी काफी फर्क पड़ सकता है।

जो लोग किसी धार्मिक संस्था से जुड़े हुए नहीं हैं और ना ही प्रार्थना या मैडिटेशन करना जानते हैं, उनके लिए यहाँ एक आसान जानकारी दी गयी है

IF YOU HAVE FAITH AS SMALL AS A MUSTARD SEED YOU CAN SAY TO THIS MOUNTAIN "MOVE FROM HERE TO THERE" AND IT WILL MOVE. NOTHING WILL BE IMPOSSIBLE FOR YOU. - JESUS (MATTHEW 17:20) WE ARE WHAT WE THINK. ALL THAT WE ARE ARISES WITH OUR THOUGHTS. WITH OUR THOUGHTS, WE MAKE THE WORLD. - THE BUDDHA (DHAMMAPADA) . . . WHOEVER BELIEVES IN ME WILL DO THE WORKS I HAVE BEEN DOING, AND THEY WILL DO EVEN GREATER THINGS THAN THESE . . . - JESUS (JOHN 14:12) HOWEVER MANY HOLY WORDS YOU READ HOWEVER MANY YOU SPEAK WHAT GOOD WILL THEY DO YOU IF YOU DO NOT ACT ON THEM? - THE BUDDHA . . . SEEK HELP THROUGH PATIENCE AND PRAYER . . . - QURAN CH. 2, VERSE 153