रक्त विषहरण परिक्षण (BLOOD DETOX EXPERIMENT)

ऐसा माना जाता है के 90% कैंसर (करकट रोग) पर्यावरण प्रदुषण के कारण होता है और अभीतक हमारे शरीर से संश्लिष्ट जीवविष (synthetic toxins) को निकाल पाने का कोई उपाय प्राप्त नहीं हुआ है। स्थिति को बदतर करते हुए, महिलायें जो शिशुओं को स्तनपान कराती हैं, वे अनजाने में स्वयं का जीवविष अपने नवजात शिशुओं के शरीर में अंतरण करती हैं जो उनके बढ़ते शरीर और मस्तिष्क के लिए हानिकारक साबित होता है। इस प्रदुषण के पश्चात् प्रमाण यह साबित करता है के स्तनपान शिशुओं के लिए सबसे उत्तम है और ये बात हमे एक जटिल दुविधा में डालती है। इस दुविधा के कारण, ये अनिवार्य है के बच्चे होने से पहले जितना हो सके हम अपने शरीर का विषहरण करें। और अलगी नस्ल को सुरक्षित रहने के बेहतर तरीके सिखाएं। जीवविष पदार्थों को त्यागने के अतिरिक्त, हम एक और कार्य कर सकते हैं। और वो ये है के हम अपने शरीर से इन जीवविषों को मुक्त करें।

इन प्रश्नो के उत्तर पाने के लिए एक सम्पूर्ण विषहरण जाँच मई २०१५ से चल रही है। जिसमे एक स्वेच्छाकर्मी (होलिस्टिक हेल्थ रिसर्च के संस्थापक) ने विषाक्तता स्तर के आधार-रेखा बनाने के लिए रक्त दान किया था। उन्होंने जून और जुलाई में २१ दिन तक उपवास रखा और एक विषहरण पथ्य पर सवार हो गए। इस विषहरण पथ्य में बृहदान्त्र (कोलन) जलसेक, परिपूरक खाद्य, वाष्प स्नान, एक्यूप्रेशर और मालिश शामिल हैं।जनवरी 2016, जुलाई 2016, और जनवरी 2017 में फिरसे रक्त लिया गया। हमने शरीर के दो सबसे आम कैंसरकारी (carcinogenic) रसायन का परिक्षण करने का निर्णय लिया: पी सी बी (PCBs) और ४,४-डी डी ई (4, 4′ – DDE), जो डी डी टी (DDT) का मुख्य भंगितअणु है।

ये रहा कुछ स्पष्टीकरण। सबसे पहले हम रक्त वसा में ४,४-डी डी इ (4, 4′ – DDE) और पी सी बी (PCBs) के स्तर को तोलते हैं, क्यूंकि ये रक्त का वो भाग है जिसमे ये रसायन सबसे ज़्यादा मौजूद है।

दाहिनी ओर दिए गए रेखा-चित्र के अनुसार, जनुअरी २०१६ में दिख रही रक्त वसा पी सी बी (PCBs) की अधिकता जीवविष स्पाइक का अवशेष प्रभाव है जो मनुष्य के उपवास रखने से आता है- वसा कोशिकाओं से निकला जीवविष। बाएं ओर दिए गए रेखा-चित्र के अनुसार, एक २१-दिन का उपवास जून-जुलाई २०१५ में रखा गया था। और उपवास के कारण ४,४-डी डी इ (4, 4′ – DDE) में 12.8% गिरावट हुई थी।ये गिरावट 2017 की वसंत ऋतू में कमज़ोर पद गया, जब सिर्फ 1% गिरावट आयी। अगस्त 2016 के शुरुआत में जीवविष स्तर को काम करने के लिए एक नए तरीके की कल्पना की गयी और उसे प्रतिदिन के उसूल पर अंजाम दिया गया। हो सकता है ये नया हस्तक्षेप जुलाई 2016 और जनवरी 2017 के बीच, ४,४-डी डी इ (4, 4′ – DDE) के आधार-रेखा से 7.31% की आश्चर्यजनक गिरावट का कारण है.। ये भी संभव है के उसी दौरान, ये नया हस्तक्षेप ही रक्त वसा पि सी बी (PCBs) की आधार-रेखा से 6.62% गिरावट का कारण हो।इस परिक्षण की मौजूदा स्थिति में, ये नया मध्यवर्तन प्रतिदिन प्रयोग किया जा रहा है और दिसंबर 2018 तक होता रहेगा। साथ में एक और उपवास जून-जुलाई 2017 में रखा जा रहा है। उपवास के दौरान और उसके तुरंत बाद एक लम्बे समय तक इस नए मध्यवर्तन का प्रयोग जीवविष स्तर की गिरावट को बढ़ा सकती है। हम (होलिस्टिक हेल्थ रिसर्च), इस मध्यवर्तन की घोसणा करने से पहले, अपने खोज-विचारों को पक्का करना चाहते हैं।दिसंबर 2018 में हमारे परीक्षण के इस पहलु की समाप्ति के बाद हम अपना लैब विवरण पाएंगे। उसके बाद हम अपने परिक्षण के प्रोटोकॉल्स की एक परिणाम सहित पूर्ण उल्लेख जारी करेंगे।

रक्त में पि सी बी (PCBs) और कीटनाशक दवाईयों की चार जाँच की कीमत $13000 हूई। इस जाँच की कीमत इतनी अधिक हुई क्योंकि हमने चार सैम्पल्स (नमूनों) की टेस्टिंग दो-दो करके करवाई। इस कारण ज़्यादा समय और दो लैब-ब्लैंक्स (lab blanks) लगे।जून 2017 में उपवास का एक और दौरा शुरू हुआ है। हमे छे महीने मध्यांतर (जून 2017, दिसंबर 2017, जून 2018, दिसंबर 2018) वाले रक्त की चार और जाँच कराने के लिए $ 8600 कि आवशकता है। इस बार जाँच की कीमत कम होगी क्योंकिहम चरों सैम्पल्स की एक साथ जाँच करवा रहे हैं। हमारा लक्ष्य रक्त वसा जीवविष के स्तर को मई 2015 के आधार-रेखा से 50% तक घटाना है।$16,200 में हम दो लोग (जिनमें से एक ने कभी उपवास न रखा हो) का रक्त जाँच करवा सकते हैं। अगर हम $40,000 इकठ्ठा करलें तो हम एक व्यक्ति के और भी मेहेंगे जाँच करवा सकते हैं। $80000 में हम दो लोग के और भी कई जाँच करवा सकते हैं।अगर हमारे पास और अधिक राशि होति तो हम कई प्रकार के जीवविष परीक्षण कर सकते और परीक्षणों का दायरा बढ़ाकर काम-ज़्यादा वसा वाले पुरुषों, महिलाओं, जवानो, और बूढ़ों को शामिल कर सकते हैं। और उनके परिणामो की तुलना कर सकते हैं। पूरी दुनिया में कोई और ऐसे अतिआवश्यक परीक्षण नहीं कर रहा है। ना ही यूनिवर्सिटीज, ना सरकार, और ना कोई कारपोरेशन। होलिस्टिक हेल्थ रिसर्च चंदा से जमा किये पैसों का 100% ज़रूरी कामों में खर्च करती है। यहाँ कोई प्रशासनिक वेतन नहीं है। ये एक स्वेच्छाकर्मी प्रयास है। इन सारे परीक्षणों के परिणाम सबके सामने लाये जायेंगे। परन्तु बिना दान के और जीवविष परिक्षण नहीं हो पाएंगे। कृपा कर के शरीर को जीवविष-मुक्त बनाने में हमारी मदद करें ताकि हम कैंसर (कर्क रोग) और उस जैसी और गंभीर रोगों से बच सकें।

ज़रा सोचिये! अगर हम महिलाओं के २० वर्ष तक में उनके शरीर के जीवविष को कम कर सकें तो वे अपने शिशुओं के अंदर 90% कम कैंसरकारी (carcinogenic) रसायन भेज पाएंगी। इससे दुनिया भर में कितने बच्चे कैंसर (कर्क रोग) से बचाये जा सकते हैं। इस सब के लिए आप लोगों का साथ चाहिए।

उपवास रखने के चमत्कारी लाभ (THE MIRACLE OF FASTING)

उपवास रखना है धर्म और संस्कृति में पाया जाता है। इसे शारीरिक और धार्मिक पवित्रता का एक माध्यम माना जाता है। उपवास रखने से शरीर की हर कोशिका ऐसे शुद्ध होती है जैसे किसी और माधयम से नहीं होती।

ईसा मसीह ने 40 दिन का उपवास रखा था।

पैग़म्बर मुहम्मद अक्सर उपवास रखते थे।

बुद्धा ने 40 दिन का उपवास रखा था।

उपवास रखना हिन्दू धर्म में एक मूल रीती है।

पैग़म्बर मूसा और एलिजाह, दोनों ने 40 दिन का उपवास रखा था।

उपवास रखना चीन के भी संस्कृति में है।

प्राचीन यूनानी वासी भी उपवास रखते थे।

अमेरिकी निवासी परंपरागत रूप से उपवास रखते आये हैं।

अफ़्रीकी शमन (जादूगर) भी उपवास रखते हैं।

दक्षिण अफ़्रीकी शमन भी उपवास रखते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी उपवास रखते हैं।

इसके अलावा, इतिहास में और भी समुदाय उपवास रखने के लिए जाने जाते हैं।